
चोपनिया रे पाना में,
भगवान लेखो लेसी राम।
दोहा – कबीर कमाई आप री,
कदे न निरफल जाए,
सो कोसा पकड़ो हुवे,
मिले अगाड़ी आय।
लेखो सावंरा पछे लिजो,
तीसा मरती आई राम,
ठंडा नीर गंगाजल भरिया,
पाया वेतो तो पीयो राम,
भुखा मरती अईयो राम,
ताजा भोजन खुब बणा,
जिमाया वे तो जीमो राम,
शिता मरती आयो राम,
सोल दुसाला खुब पड़ा,
ओढाया वेतो ओढो राम,
पगा बलती आयो राम,
ताजी ताजी मोजड़ी खुब पड़ी,
पेनाया वे तो पनो राम,
स्वर – स्वामी सच्चिदानंद जी आचार्य।
प्रेषक – सुभाष काकड़ा मदन पुष्करणा।
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