
छाई रे खाटू नगर में बहार
छाई रे खाटू नगर में बहार,
श्याम मिलन की रुत आई,
आया फागुण का रंगीला त्यौहार,
जो हैरान जो है परेशान,
सुनता सभी की खाटु का श्याम,
फागुण में लगती अदालत बड़ी,
बनते है काम यहाँ हर एक घडी,
तुम भी आना फागुण में हर बार,
जिन नैनो की ये है ज्योति,
रौशनी उनकी कम ना होती,
ये ही उजाला ये ही है किरण,
किरपा से इनकी बनता जीवन,
इनके होते ना होता अंधकार,
क्या राजा क्या है फ़क़ीर,
इनके ही हाथों सबकी तक़दीर,
ये ही तो लेख सारे लिखता है,
ये ही तो किस्मत बदलता है,
ये ब्रम्हा और विष्णु अवतार,
केवट बना और सौंप दे पतवार,
नैया होगी ना तेरी मझधार,
नैया कोई तेरी रोक ना पाए,
दावा है ‘निर्मल’ का होगी ये पार,
सबकी नैया का खेवनहार,
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