
कान्हा की बंसी जब भाजे
कान्हा की बंसी जब भाजे मनवा मोरा झुवन लागे
तेरी मुरली की धुन पे सांवरियां मैं तो दौड़ी दौड़ी आउ रे सांवरिया
सुन मोरे कान्हा तेरी मुरलिया ने चैन मेरा है छीना,
कितना मीठा दर्द पिया को मोहन तूने है दीना,
तेरी डोर मुझको तो खींचे आउ तेरे पीछे पीछे,
हे मुरली धर तेरी धुन पे अंग अंग है मोरा किरके,
कैसे समबालु मेरे मन को जियरा मोरा ये तड़पे,
सात सुरो सा तेरा सनगम,
सुर से सुराला तेरा बंधन,
प्रेम ये तेरा ऐसा निराला हो गई मैं वनवारिया,
मन बोले सुर ये तेरे ढूंढे तुझको नजरिया,
हाय तूने मोरा चित है चोरा तू लुटाये मनवा मोरा,
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