
छायें काली घटाए तो क्या
तेरे आँचल के नीचे हूँ मैं
आगे आगे वो चलती मेरे
अपनी श्यामा के पीछे हूँ मैं
उसने पकड़ा मेरा हाथ है ,
फिर डरने की क्या बात है
श्यामा प्यारी मेरे साथ हैं
इनके रहते कोई कुछ कहे
बोलो किस की ये औकात है
उनकी करुना का वर्णन करूँ
मेरी वाणी में वो दम नहीं
जबसे तेरा सहारा मिला
फिर सताए कोई ग़म नहीं
करती ममता की बरसात है
मेरी लड़ो की क्या बात है
क्यों तू भटके यहाँ से वहां
इनके चरणों में आ बैठ न
छोड़ दुनिया के नाते सभी
श्यामा प्यारी से नाता बना
ये कराती मुलाक़ात है
मेरी श्यामा की क्या बात है
गर हो जाये करुना नज़र
बरसाना बुलाती हैं ये
दिल क्यों न दीवाना बने
हिरदये से लगाती है ये
प्यार करने में विख्यात है
मेरी लाडो की क्या बात है
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