
छिन ले हस के सबका ये मन
छिन ले हस के सबका ये मन,
सखी री मेरो राधा रमन,
राधा रमन सखी राधा रमन।।
मुखड़े को देख कोटि चन्दा लजाये,
घुंघराली लट पे घटाये वारी जाये,
या के जादू भरे दो नयन,
पतली कमर किन्तु अंग है गठिले,
अधरो पे अमृत है नैना नशिले,
थोड़ा बचपन है थोड़ा यौवन,
फ़ुलन कि सोये गले माला बेजन्ती,
कावलीया काली ओर पटका बसन्ती,
या के पेजनिया बाजे चरन,
राधा हृदय मे करे रमण बिहारी,
गौवन की एक छवी लागे अती प्यारी,
राधा बिजरी के साथ श्याम घन,
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