
छेती भवना ते बुला ले नच्दा गाऊंगा आवा मै
दर ते आवा मैं तेरा दर्शन पावा मैं
दर्शन पाके भंगडे पावा जय जय कार बुलावा मैं
ठंडियाँ ठंडियाँ मस्त हवावा कोयल कु कु बोले
उचे पर्वत बैठी मैया अपनिया बाहा खोले
ठंडा वान गंगा दा पानी सब दे दिल नु मोह ले
चरण पादुका दर्शन करके अर्धकवारी जाना,
सांझी छत ते बेह के मैया तेरा नाम ध्याना,
हाथी मथा कठिन चडाई पर मैं नही गबराना,
भवन पोहंच के पिंडी रूप दा पावन दर्शन पाना
दिल विच रूप बसा के सोहना जीवन सफल बनाना
दर्शन फिर भेरो दे करके वापिस घर के आना
फिर बत्रा नु बुला के घर जागा करवावा मैं
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