
खोटो हूँ या खरो हूँ, तेरे द्वार प पड्यो हूँ,बालक हूँ मात तेरो, निजरां न थोड़ी फेरो ।। खोटो हूँ ...
तर्ज – गर तुम जुदा न होगे ।
थारे स के है छानी, सो क्यूई आप जाणो,घट-घट मं वास थारो, मेरी पीड़ भी पिछाणो,के बोल कर बताऊं, थाने तो सब है बेरो ।।
बालक हूँ ...
हे सर्वसुख की दाता, हो भाग्य की विधाता,है यो युगां स रिश्तो, म्हें बेटा आप माता,किरपा करो भवानी, ममता की दृष्टि गेरो ।।
थारो आदि अन्त मैया, कोई न जाण पायो,ब्रह्माण्ड में है जो कुछ, सब आप को जचायो,भक्तां की लाज राखो, असुरां न मार गेरो ।।
पर्बत से आवो चलकर, नदियां को रूप धार्यां,गंगा, जमुना, सरस्वती, घणे पापियां न तार्यो,माँ ‘अजय’ न बणाले, थारे चरण को चेरो ।।
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