
छोड़ो ये बैरी जमाना हमको बरसाने जाना लाडली बुलाए निज धाम चलो जी चलो बरसाना धाम
छोड़ो ये बैरी जमाना
हमको बरसाने जाना
लाडली बुलाए निज धाम
चलो जी चलो बरसाना धाम
इस जग ने बहुत रुलाया
हर दिन बस दुख दिखलाया
जब भी बरसाने आया..लाडो ने सुख बरसाया
बृज रज मस्तक पे लगा के..जब राधे राधे गाया
मेरी लाडली जू आई हर बार.. चलो जी चलो बरसाना धाम...छोड़ो ये बैरी जमाना
पच्चीस में जो गलती करी थी..
छब्बीस में नहीं करूंगी...
बिसराकर सुध तन मन की..श्री श्यामा श्याम रटुंगी
डोलूँगी बृज गलियन में.. संतन का संग करूंगी..
मेरी कुटिया बनेगी इसी साल...चलो जी चलो बरसाना धाम ...छोड़ो ये बैरी जमाना
लाडो बड़ी करुणामई है..
गलती हर माफ करेंगी..
हौ तुम मोहित का गौरव.. इक दिन बृजबास भी दोगी
कर दोगी शून्य सब हिसाब..चलो जी चलो बरसाना धाम ...छोड़ो ये बैरी जमाना
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