
जगत के कण कण में भगवान,
वर्णन करते कभी ना थकते,
जिसका वेद पुराण,
जगत के क़ण कण मे भगवान,
तर्ज – भगत के वश में है भगवान।
विष्णु जी बसते मन में,
बसे श्री लक्ष्मी जी धन में,
राम जी सबके तन में,
जानकी प्रभु कीर्तन में,
जन जन के प्राणो में बसते,
पवनपुत्र हनुमान,
कृष्ण बंसी की धुन में,
राधिका नाचे उनमें,
हिमालय पर शिव बसते,
पार्वती गंग जमुन में,
श्री गणेश जी बुद्धि बाँटते,
मात शारदा ज्ञान,
भाग्य में बसे विधाता,
श्रष्टि के है निर्माता,
जगत के संचालन में,
प्रमुख माँ दुर्गा माता,
‘अनुज’ और ‘देवेंद्र’ पे प्रभु का,
कोटि कोटि अहसान,
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