
कहते तेरे दर पे
बनता है नसीबा सबका
तू ही सुनता है सबके दुखड़े
तू ही है दाता सबका
एक मेरी फरियाद भी सुनले भगवन
तू ही चलाता है जग में खाता सब का
मोरी अरज सुनो
मोरी अरज सुनो गणराजा
हे देवो के महाराजा
मोरे भाग्य जगाने आजा
तेरे दर पे देखे है मैंने
मंगतो की झोली भरती है…
और काम सभी बन जाते है
बिगड़ी तक़दीर सवरती है…
मोरी लाज राखो
मोरी लाज राखो गणराजा
दर दर की ठोकर खा कर मैं
अब द्वार तुम्हारे आई हूँ…
बस तुम से आस लगायी है
फरियाद यही मैं लाया हूँ…
मोरी विपत हरो
मोरी विपत हरो गणराजा
अंतिम यही इच्छा मेरी
दिन रात तेरे गुण गाऊँ मैं…
और श्याम सुबह तेरा नाम जपुऊँ
और तेरी चौखट पे मर जाऊँ मैं…
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