
जब जब भी तेरा प्रेमी आंसू कहीं बहाए
जब जब भी तेरा प्रेमी,
आंसू कहीं बहाए,
देखें है श्याम सबने,
तेरे नैन डबडबाए,
तर्ज – मैं ढूंढता हूँ जिनको।
भजन – मैं हूँ शरण में तेरी।
कोई तो देव कहता है,
कोई दातार कहता है,
कोई माता पिता बंधू,
सखा दिलदार कहता है,
जिस भाव से पुकारा,
उस रूप में तुम आए,
तुम्ही से प्यार पाया है,
प्रभु पहचान पाई है,
बना जबसे तेरा प्रेमी,
अनोखी शान पाई है,
तेरी कृपा से तारे,
किस्मत के जगमगाए,
सदा ही सोचता हूँ मैं,
हमारा कैसा नाता है,
पुकारूँ जब कभी दिल से,
सदा तू दौड़ा आता है,
भूलें भुला के मेरी,
हमें धीर तू बँधाए,
तुम्हारी आस है मुझको,
सदा विश्वास है मुझको,
सदा रहते हो संग मेरे,
यही आभास ‘रोमी’ को,
तुमने प्रभु संभाला,
जब पाँव डगमगाए,
स्वर तथा रचना – रोमी जी।
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