
जब भी श्याम के सेवक पर कोई संकट आएगा
जब भी श्याम के सेवक पर कोई,
संकट आएगा,
श्याम धणी लीले पर चढ़कर,
दौड़ा आएगा।।
तर्ज – अब तो आजा करके बाबा।
इस कलियुग में श्याम ही देता,
दुखियारों का साथ,
हार भगत की देख ना सकता,
मेरा दीनानाथ,
हाथों से निकली बाजी भी,
तुझे जिताएगा,
तूफानों में कागज़ की,
कश्ती तैरा देगा,
तेरे दुखड़ों को सांवरिया,
जड़ से उखाड़ेगा,
तेरे सर पे हाथ ये अपना,
श्याम फिराएगा,
जैसे भी हालात हो ‘माधव’,
हिम्मत कभी ना हार,
तेरे हर एक कदम कदम का,
साथी लखदातार,
तुझको तेरी परछाई में,
नज़र वो आएगा,
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