
जब श्याम की यादें आती है
जब श्याम की यादें आती है,
तब राधा यूं घबराती है।।
तर्ज – जब याद की बदली छाती है।
राह तुम्हारी तक तक कर,
आंख भी थक थक जाती है,
जब पाए न दर्शन-२,
आंख तुम्हारे,
झर झर नीर बहाती हैं,
तुम बिन सूना है जीवन,
तुम बिन सूना आंगन है,
पर हे मन मोहन-२
‘शिव’ को प्रीतम,
तेरी याद सताती है,
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