
कश्मीर की वादियों में
दो गुफा सुहानी
एक में मैयाजी रहती हैं
दूजे में भोले दानी।।
हर हर महादेव शिव शंभु
जय हो बाबा अमरनाथ
जय अमरनाथ बर्फानी।।
भुके भोजन देते हैं
और प्यासे को पानी।।
जब ये ऊंचे ऊंचे पर्वत
जब खाती खाती गई
बोलो ॐ नमः शिवाय
जपलो ॐ नमः शिवाय।।
बोल बम बोल बम बोल बम बोल बम बम बम
अमरनाथ बाबा की दूर है नगरिया
ऊंचे ऊंचे पर्वतो की कथा है डगरिया।।
ठंडी ठंडी चले हवाएं बर्फी तूफानी
फिर भी चालक आते हैं वो
जिसने मन में है थानी।।
जो भोले के द्वार आए
फिर वो कहे दुख पाए।।
एक बरश में दर्शन एक बार होते हैं
बरफ का स्वरूप लेकर भोले साकार होते हैं।।
बरफ का स्वरूप में भोले साकार होते हैं।।
भक्तो को भगवान है प्यारे
प्रीत की रीत निभाओ
दर्शन कार्लो शिव शंभु के
हर हर बम बम गाओ
बार बार वो आना चाहिए जो एक बार आए।।
हर हर ॐ नमः शिवाय
बम बम ॐ नमः शिवाय।।
सावन के पूर्णिमा को दर्शन जो पता है
अमरनाथ बाबा से मुह मंगा पाता है
उसके दुख की रात बीताती आती भोर सुहानी
ना भोले सा दाता कोई ना भोले सा दानी
किस्मत वाला है वो लक्खा भोले जिसे बुलाये।।
भोले तेरे नाम से गुजरा हमारा
आओ मिले गाये शिव शिव गाये
भला बुरा ना देखे ना वो देखे गोरा काला
भोले का रूप निराला से बहती जटा में गंगा
एक ताल पे डमरू बाजे बम चिक चिक बम
भोला भांग खौगे या दम लगाओगे
दुनिया में एक बात बड़ी मशहूर है
प्यारी प्यारी तेरी गोरजा कुए बीच गिराई
शीश गंग अर्धन पार्वती सदा विराजे शिव योगी
एक लोटा जल चढ़ाओ ध्यान बस दो पल लगाओ
सारे जग को पालते हैं मेरे नील कंठ भगवान
मन छोड़ व्यार्थ की चिंता तू शिव का नाम लिए जा
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