
जाएगा जब यहाँ से,
कुछ भी ना पास होगा,
दो गज कफ़न का टुकड़ा,
तेरा लिबास होगा।।
काँधे पे धर ले जाए,
परिवार वाले तेरे,
यमदूत ले पकड़ कर,
डालेंगे घेरे तेरे,
पीटेगा छाती अपनी,
कुनबा उदास होगा।
चुन चुन के लकड़ियों में,
रख देंगे तेरे बदन को,
आकर के झट उठाले,
मेहतर तेरे कफ़न को,
दे देगा आग तुझमे,
बेटा जो ख़ास होगा।
मिट्टी में मिले मिट्टी,
बाकी तो ख़ाक होगी,
सोने सी तेरी काया,
जल कर के राख होगी,
दुनिया को त्याग तेरा,
मरघट में वास होगा।
प्रभु का नाम जपले,
बेड़ा ये पार होवे,
माया मोह में फंसकर,
जीवन अमोल खोवे,
हरी का नाम जपले,
बेडा जो पार होगा।
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