
मारे कंकरिया काहे को फोड़ी मटकी
कान्हा कौन तुझे सम्जाये तुझको लाज शर्म न आये
चोरी करके माखन खाए काहे हम को रोज सताए
मेरी पकड़ी कल्हाई कान्हा क्यों झटके
मारे कंकरिया काहे को फोड़ी मटकी
माखन तो है एक बहाना क्यों तुम करते जोर जोरी,
तेरे हाथ नही आऊगी मैं हु बरसाने की छोरी
बोलो जरा बोलो जरा जुबा क्यों अटकी
घर में लाखो गैया फिर भी कान्हा करते माखन चोरी
छोड़ो मुड जायेगी कान्हा नाजुक नर्म कलहिया मोरी
जानती हु बात तेरी घट घट की
करू शिकायत मैया से तोहे एसी सबक सिखाओ
अब छोड़ो चोरी करना अब तो जेल में बंद करवाऊ
भीम सेन कान्हा करे छीना जपटी,
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.




