
जिंदगी है मगर पराई है,
दोहा – किचस मेहरबा नसीब से देखो,
या निगाहें अजीब से देखो,
दूर से क्या समझ में आएगा,
जिंदगी को करीब से देखो।
लोग कांटो की बात करते हैं,
हमने फूलों से चोट खाई है,
जिंदगी है मगर परायी है,
अच्छे-अच्छे ने हमको धोखा दिया,
तू भी दे दे तू भी दे दे तो क्या बुराई है,
तू भी दे दे तो क्या बुराई है,
सारे अपने तो मुझसे रूठ गए,
मेरी किस्मत मेरी तन्हाई है,
लोग हमको तो बुरा कहते ही हैं,
तू भी कह दे तू भी कह दे,
तो क्या बुराई है,
तू भी कह दे तो क्या बुराई है,
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