
जितना दिया साँवरिया तूने,
इतनी मेरी औकात ना थी।
तर्ज – फुल तुम्हे भेजा है खत में।
दोहा – दर ब दर सर को झुकाने की,
जरूरत ना रही,
अब हमें अश्क बहाने की,
जबसे पकड़ा है मेरा हाथ,
खाटू वाले ने,
अब कही हाथ फ़ैलाने की,
मुझपे उपकार लखदातार,
किए जाता है,
अपनी करुणा के वो भंडार,
दिए जाता है,
मैंने एक बार सुनाया तुझे,
दुखड़ा अपना,
तू बार बार लगातार,
दुखो के गहरे भंवर से,
मुझे निकाल लिया,
शुक्रिया सांवरे तेरा,
मुझे संभाल लिया।
रख ली तूने बात ओ प्यारे,
मुझमे तो कोई बात ना थी,
ओ सावरे ओ सावरे,
जपते रहेंगे तेरा नाम रे।।
पड़ गया मेरा दामन छोटा,
इतना दया का दान दिया,
दी अपनी भक्ति की शक्ति,
मान दिया सम्मान दिया,
लखदातार तेरा शुकराना,
श्री चरणों का ध्यान दिया,
बिन पतवार की नाव था मैं जब,
डोर मेरी तेरे हाथ ना थी,
जितना दिया संवारिया तूनें।।
बदल गयी तकदीर की रेखा,
दर तेरे शीश झुकाने से,
शीश के दानी शीश उठाकर,
अब मिलता हूँ जमाने से,
बेगाने भी हो गये अपने,
अपना तुझे बनाने से,
नैन बरसते थे जब तेरी,
करुणा की बरसात ना थी,
दीप जले ‘संदीप’ के मन में,
जबसे तुम्हारी रहमत के,
लखदातार खुले रहते है,
तबसे द्वार ये किस्मत के,
मौज में है हम बनके भिखारी,
श्याम तुम्हारी चौखट के,
हम थे अकेले आगे पीछे,
खुशियों की बारात ना थी,
स्वर – संदीप बंसल
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.
