
जिस नैया के श्याम धणी हो खुद ही खेवनहार
जिस नैया के श्याम धणी हो,
खुद ही खेवनहार,
वो नैया पार ही समझो,
बिना पतवार ही समझो।।
तर्ज – स्वर्ग से सुन्दर।
तूफान में कश्ती चाहे,
हिचकोले खाये,
भंवर के थपेड़े चाहे,
जितना डराये,
जग का खेवनहारा थामे,
खुद जिसकी पतवार,
माझी बनेगा जब ये,
सांवरा तुम्हारा,
मझधार में भी तुझको,
मिलेगा किनारा,
जिसका रक्षक बनकर बैठा,
लीले का असवार,
‘हर्ष’ तू जीवन की नैया,
इसको थमा दे,
इसके भरोसे प्यारे,
मौज तू उड़ा ले,
हाथ पकड़ ले जब ये तेरा,
फिर किसकी दरकार,
गायक – मनोज ठठेरा।
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