
वीणा वादिनी ज्ञान की देवी
अपनी दया बरसा देना
मेरे सिर पर हाथ धरो माँ
ज्ञान की ज्योति जगा देना
ज्ञान की ज्योति जगा देना.....-2
तू सारे संगीत सँवारे,
रागों में आभास तेरा
साजों की आवाज तुझी से
सारे सुरों में वास तेरा
राग रागिनी मेरी सरगम
इनको और खिला देना
ग्रंथों के हर एक पन्ने पर
तू ही शब्द सजाती है
कलम थमा के तू कवियों से
प्यारे गीत लिखाती है
प्यारे गीत लिखती है......
चलती रहे बस मेरी लेखनी
इतना योग्य बना देना
तेरी कृपा से कला निखरती
रंग खिले तस्वीरों में
तू सतरंगी जीवन करती
रंग भरे तकदीरो में
जग में ऊँचा नाम रहे माँ
ऐसी युक्ति लगा देना
जब जब बोलूं कोई वाणी
अमृत की बौछार लगे
मधुर वचन हर मन को भाए
वीणा की झंकार लगे
कंठ बसो है मात शारदे
मीठे बोल सिखा देना
हाँ ज्ञान की ज्योति जगा देना
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