
झोली भरले रे खाटू में बाबो धन बरसावे रे
झोली भरले रे खाटू में बाबो,
धन बरसावे रे, झोली भरले रे,
धन बरसावे श्याम बुलावे,
क्यों नहीं जावे रे, झोली भरले रे,
चलो जी चलो खाटू में,
बैठ्यो बाबो श्याम,
बाबा का दर्शन कर,
थारो हो जासी कल्याण।।
श्याम धणी दातार घणो है,
जो मांगे सो पावे रे,
भर भर मुठ्ठी दोनों हाथ्या,
खूब लुटावे रे, झोली भरले रे,
मांगो जी मांगो,
खाटू में देवे बाबो श्याम,
जो मांगो मिल जासी,
सब पूरा करसी काम।।
अन धन लक्ष्मी बेटा पौता,
सुख सम्पति का ठाट घणा,
घर ग्रहस्ती की गाडी चाले,
कष्ट मिटावे रे, झोली भरले रे,
ले ल्यो जी ले ल्यो,
खूब लुटावे बाबो श्याम,
तेरी झोली भर जासी,
तू केहणो मेरो मान।।
श्याम धणी की सेवा करले,
भरया रह्वे भंडार तेरा,
बैठ्यो बैठ्यो जीवन भर तू,
मौज उड़ावे रे, झोली भरले रे,
नाचो जी नाचो,
बाबो लगायो दरबार,
ऐ की सेवा करने सु,
तेरा भर जासी भंडार।।
‘बनवारी’ तू पतो लगाले,
देख करिश्मो सांचो है,
खाली झोली लेकर जावे,
भर कर ल्यावे रे, झोली भरले रे,
सुण ल्यो जी सुण ल्यो,
सांची बताऊँ थाने बात,
म्हे तो मौज उड़ावा हाँ,
म्हारे सिर पर ऐ को हाथ।।
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