
टाबरियां की अटकी नईया करदो परली पार
टाबरियां की अटकी नईया करदो परली पार,
अरजी हमारी बाबा थाम ले वो पतवार,
इब तो पल पल जीनो हो गियो बहरी है,
इस संकट की घडी में आशा थारी है,
हे आया एही बात बने गी सुन लियो लाखदातार ,
बवर विच नाव पुराणी डोले है,
जी घबरावे जब चरमरिया बोले है,
बनकारी घर आ जाओ महरे टूटी नाव सवार,
डूब गई तो दुनिया हसी उडावे गी,
दुनिया लेती नाम तेरो शर्मावे गी,
अपनी लाज बाचा सांवरिया मेरो कर उधार,
अर्जी हमारी बाबा थाम ले वो पतवार,
गज की सुनी पुकार श्याम जत आया,
दर्पोती मीरा ने भी नही थे नट पाया,
हमारी बार करी क्यों देरी कर कोई उपचार,
श्याम सुंदर ने एक भरोसो तहरो है,
झूठा जग में और नही कोई हमारो है,
थारी म्हरी यारी पुरनी तू यारो का यार,
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