
डाली बाई ऋषियों री लड़की,
नूगरा नहीं पिछाणी रे,
वा नूगरा रो मूडो कालो,
नरका रा हितकारी रे।।
भृगु रिसी ने कपट रचायो,
पारो काल निकाली ले,
ले पारो दरखत मेलियो,
जद होईया बाई डाली,
डाली बाई ऋषियो री लडकी,
रामदे विरमदे गमन सिधाऐ,
हो घोडे असवारी,
दरखत पर ईक लाद्यो पिजरो,
माह मिली बाई डाली,
कवै रामदे सुणो विरम दे,
कन्या मिली कूवारी,
आ कन्या रिखिया ने सोपो,
नाम धराओ डाली,
रामदे विरम दे रा चारे बाछडा,
भगती कमाई बडी भारी,
हरी चरणे भाटी हरजी बोलिया,
घर अजमल अवतारी,
गायक – रणजीत जोईया।
प्रेषक – गोविन्द राजपूत।
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