
तंग मै तो आ गई हूँ तेरे मुरलीधर से।
तेरे श्याम के डर से, तेरे श्याम के डर से॥
(तर्ज :- मै तुझको भगा लाया हूँ )
तंग मैँ तो …
जालिम है सितमगर है बङा है बेरहम।
आते जाते तंग करता है मुझे हरदम।
हो गया है मुश्किल अब निकलना घर से॥१॥
तेरे श्याम के डर से …
गई थी बेचने माखन मैँ तो वो है आया।
घेर लई मुझको सब ग्वाल बाल ले आया।
दही सारा बिखरा दिया फोड़ मटकी कंकर से॥२॥
छीना झपटी करता है बड़ा ही बेदर्दी है।
समझाओ मैया लाला को मेरी यह विनती है।
नहीँ तो करूँगी मैँ शिकायत जाके बाबा नंद से॥३॥
बोली यशोदा सुनो तुम गूजरी मस्तानी।
कान्हा आयेगा जब ‘खेदड़’ पूछूँगी ये कहानी।
सजा उसको दूंगी मैँ वादा है ये तुमसे॥४॥
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