
तुम्हे अपने बाबा पे भरोसा जो होता,
तू हर दम ना रोता तू हर दम ना रोता,
एहसास उनकी कृपा का जो होता,
तर्ज – अगर तुम ना होते।
सबकुछ मिला है फिर भी है शिकायत,
अच्छी नहीं है प्यारे तेरी ये आदत,
दुखियों का दुःख तूने देखा जो होता,
माया के घेरों ने ऐसा कैसा है,
अभी तक तू लोभ के भंवर में फसा है.
भक्ति से जीवन अपना संवारा जो होता,
औकात से ज़्यादा पाया है तूने,
उसकी दातारि को भुलाया है तूने,
खुद में अपने ज्ञान को उतारा जो होता,
भक्ति को अपनी तूने दिखावा बनाया,
जो कुछ कमाया ‘रोमी’ सारा गंवाया,
खज़ाना ये भक्ति का संभाला जो होता,
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