
तूने सबके काज, 'सवारे माँ
कभी मेरे भी सवारो, तो जानू
(मेरे काज सवारों तो जानू
कई भव से पार, 'उतारे माँ
कभी मुझे भी उतारो, तो जानू
( मुझे पार उतारो, तो जानू,
जग तेरा खेल, तमाशा माँ,
तेरी, जो इच्छा, तूँ कर सकती
तूँ ज़रा सा हाथ, हिला कर के,
गागर में, सागर भर सकती
तेरी ममता सब को, 'पुकारे माँ
कभी मुझे भी पुकारो, तो जानू
तेरी पड़े ज़रा सी, छाया तो,
माँ विष भी अमृत, हो जाता
गुनाहगार, गुनाह से कर तौबा,
तेरे ज्ञान में, हरदम खो जाता
ओ भक्तों के कष्ट, 'निवारे माँ
भक्तों के कष्ट, 'निवारे माँ
कभी मेरे भी निवारो, तो जानू
तेरे एक इशारे, पर मईया,
धरती पर अम्बर, आ सकता
यह सूरज, शीतल हो सकता,
चँदा भी आग, लगा सकता
तूँ दया से सब को, 'निहारे माँ
मुझको भी निहारो, तो जानू
ओ कई भव से पार, 'उतारे माँ
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