
काया रा नगर में रे,
संतो सुरता कुवारी रह जासी,
सुरता कुवारी रह जावे रे,
इन सत्य पुरूष परणावो,
घणा अहंकार में,
नाश नी होवे इन ने,
एडो वर परणावो ओ जी,
रोवा पडु तो आवे नही रे,
इन ने अखंड चुडलो पहरावो,
बुढापनो तो आवे नही इन ने,
आठो पोर ओतो सनमुख रेवे,
रोज दयानंद रो लावो,
सत्य पुरूष री सेलानी तो,
सतगुरु पास मंगावो ओ जी,
एक घडी री विलंब बिना,
छोका लगन लिखावो,
सतगुरु साचा लगन लिखे जद,
झट इनने परणावो ओ जी,
रामजीराव कहे संत मिलेने,
तुवजा इनरी मिटावो,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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