
तेरी इस अदा ने मारा तेरी उस अदा ने मारा
तेरी इस अदा ने मारा,
तेरी उस अदा ने मारा।
दोहा – ये कमल है या,
चाँद पूनम का,
या तराशा हुआ कोई नगीना है,
इस गजब के,
निखार ने तेरे,
मेरे इस दिल का,
करार छीना है।।
किस किस का नाम ले हम,
तेरी हर अदा ने मारा,
खूबसूरत अदा का खजाना है तू,
धड़कते दिलों का बहाना है तू,
हम होश खो चुके है,
मदहोश हो चुके है,
आँखों में जो बसी है,
उस मयकदा ने मारा,
कन्हैया का ख्याल,
दिल से निकलता नहीं,
दिल ये तेरे सिवा,
कही बहलता नहीं,
मेरी तुझसे है करीबी,
ये है मेरी खुशनसीबी,
अपना मुझे बनाया,
तेरी उस वफ़ा ने मारा,
गुलाबों की महक,
तुझमे समाई है,
तू कविता गजल है,
या रुबाई है,
तेरा ‘हर्ष’ गा रहा है,
तुझको रिझा रहा है,
मेरा दिल चुरा लिया है,
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