
तेरे चरणों में मेरा ठिकाना रहे,
जो भी देखे मुझे दीवाना कहे।।
दोहा – जो आप ठुकराओगे तो प्यारे,
हम और कहाँ फिर जाएंगे,
छान कर ख़ाक ज़माने भर की,
फिर लौट यहीं पर आएँगे।
नीच अधम कामी कुटिल,
अरे जैसो हूँ मैं तोय,
नीज चरणन में राखिए,
मोहे नटवर नन्द किशोर।
नटवर नन्द किशोर मेरे,
प्राणो से प्यारे,
छोड़ जगत का मोह,
पड़ा मैं तेरे द्वारे।
यार कोई नहीं मिले मुझे,
इस भव सागर के बिच,
दाता अपना लो अभी,
हरी मैं अधम अति हूँ नीच।
लोग पागल दीवाना नचैया कहे,
चाहे मुझको गवैया बजैया कहे,
बैठ भक्तों में ताली बजैया कहे,
मेरी वाणी पे तेरा तराना रहे,
मेरी यारी को मशहूर कर दीजिये,
सारे रंजो अलम दूर कर दीजिये,
जाम मस्ती का मदमस्त भर दीजिये,
तेरे मंदिर को जग मैखाना कहे,
आके इक बार मोहन जरा देखलो,
मेरी रुसवाई का माजरा देखलो,
जैसा भी हूँ मैं खोटा खरा देखलो,
‘किशन ब्रजवासी’ जीवन सुहाना रहे,
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