
लगन लगी मोहे लगन लगी,
तेरे नाम की मुझको लगन लगी,
तेरे रंग में मैं तो रंग ही गयी,
तेरी प्रीत में मैं तो डूब गई,
तेरी प्रीत का ऐसा रंग चढ़ा,
तेरी बंसी की धुन बींद गयी,
मेरे अंतर्मन को चीर गई,
सांवरिया सांवरिया,
यशोदा की आँखों का तारा,
अपने भक्तों का है प्यारा,
पालनहारा कृष्ण कन्हैया,
तू चितचोर है बंसी बजैया तू,
चोरी कर माखन खाता तू,
भक्तों के चित को चुराता था,
काली कमली है बांकी चितवन,
वा पे वारूँ मैं तो तन मन,
अच्युतम केशवम कृष्ण दमोदराम,
राम नारायणम जानकी वल्लभम,
कौन कहता है भगवान आते नहीं,
तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं।
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवा,
पित मात स्वामी सखा हमारे,
राधे कृष्णा राधे कृष्णा .........
जो है अलबेला मद नैनो वाला,
जिसकी दीवानी ब्रिज की हर बाला,
वो किसना है वो किसना है,
गोविन्द बोलो हरी गोपाल बोलो,
राधा रमण हरी गोविन्द बोलो........
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