
तेरे होते श्याम सांवरे डूब रहा कैसे मजधार
तेरे होते श्याम सांवरे,
डूब रहा कैसे मजधार,
तू ही गर समझेगा पराया,
कौन बनेगा खेवनहार,
तर्ज – कस्मे वादे प्यार वफ़ा।
देखे – नैया है मझधार श्याम इसे।
मेरी मज़बूरी को समझना,
सबके बस की बात नहीं,
किसको सुनाऊँ दर्द मैं अपना,
गैर है सब कोई ख़ास नहीं,
सहते हुए ही तुझको पुकारूँ,
आ जाओ लीले असवार,
मेरी तमन्ना छोटी सी है,
करने की दीदार तेरा,
तेरे बस सबकुछ बाबा,
खुद पर ना अधिकार मेरा,
छोड़ी मैंने तेरे भरोसे,
जो भी बची है सांसे चार,
‘राजू’ रह ले श्याम शरण में,
इससे बड़ी ना है सरकार,
लाखो तर गए इस चौखट से,
तू भी हो जाएगा पार,
फिर तू कहेगा श्याम के रहते,
नहीं डूबा कोई मजधार,
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