
तेरो लाल यशोदा छल गयो री
मेरो माखन चुरा कर बदल गयो री
मैंने चोरी से इसे मटकी उठाते देखा
आप कहते हुए औरो को खिलते देखा
नाच कर घूम कर कुछ नीचे गिरते देखा
माल चोरी का इसे खूब लुटाते देखा
मेरे मुह पर भी माखन मेल गयो री
हाथ आता ही नहीं दूर दूर रहता है
चोर है चोर ये चोरी में चूर रहता है
चोरी कर के भी सदा बेक़सूर रहता है
सर पे शैतानी का इस पे फितूर रहता है
मेरे माखन की मटकी उदल गयो री
हस कर मांगता है और कभी रोता है
अपने हाथो से दही आप ही बिलोता है
ये दिन पे दिन भला क्यों इतना हटी होता है
न दो तो धुल में लौटता और सोता है
मेरो आँचल पकड़ कर मचल गयो री
इसे समझ दे यशोदा ये तेरा बेटा है,
चोर ग्वालो का एक ये ही चोर नेता है,
मार पड़ती है और ये मजा लेता है
इसके बदले में जरा बंशी बज देता है,
जाया मोती कान्हा की शरण गयो री,
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