
तेरा खेल समझ में आया ना,
ओ नगरी के बसाणे आले,
तेरा खेल समझ म्ह आया ना,
कृष्ण की ज्यूं नगर म बरसै,
कोई पाज्या कोई पाण न तरसै,
कोई ठाकै नजर लखाया ना,
हो नगरी के बसाणे आले,
कदे बुढा कदे बणकै गाबरू,
दीन अबला की बचावै आबरू,
कदे असली रूप दिखाया ना,
पलक झपकते भाग जगावै,
कहाँ तै आवै कहाँ तू जावै,
तेरा असल ठिकाणा पाया ना,
रंगया गजेन्द्र तेरे रंग म,
भजन करै लक्की के संग म्ह,
अमर रहै सदा काया ना,
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