
दशरथ नंदन राम,
अयोध्या आ रहे,
घर घर में खुशहाली,
बनकर छा रहे,
आ रहे, प्रभु आ रहे,
प्रभु रघुकुल के सरताज,
दशरथ नन्दन राम,
तर्ज – दिल दीवाना ना जाने।
हर घर में दीपक जले,
फूलों से राहें सजे,
प्रभु राम के दर्शन को,
पलकें बिछाए सब टके,
आओ प्रभु अब तरसे नयन,
देखो यहाँ सब प्रेम मगन,
भौरें गुनगुना रहे,
गीत ख़ुशी के गा रहे,
पहले ना देखा कभी,
गगन भी शीश झुका रहे,
घड़ी अब हमारे करीब आ गई,
ख़ुशी अब हमारे नसीब आ गई,
धन्य हुई अवध नगरी,
आज भरी ख़ुशी की गगरी,
झूम झूम के गाएंगे,
हर मौसम में अब कजरी,
आया दिवस अब मनभावन,
पाएंगे प्रभु सिंहासन,
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