
दादा खेडे तेरे नाम की खटक कसुती लागी स
दादा खेडे तेरे नाम की,
खटक कसुती लागी स,
ज्योत जगादी तेरी,
ज्योत जगादी स।।
हलवा पुरी खीर बनाके,
करया तेरा भडांरा हो,
रविवार न भकता का तेरे,
दर प पडरया लारा हो,
जो सच्चे दिल त आया,
उसकी सोई किस्मत जागी स,
शकंर का अवतार कहे तु,
सारे गाम का रुखाला हो,
बडी विता म पडया था दादा,
तने आण सभांला हो,
सुखा पडया था खेत मेरा तने,
सामण कि झडी लादी स,
दादा खेडे अपने दास प,
करिये एक उपकार हो,
मेरे अगंना फूल खिलादे,
सुणले मेरी पुकार हो,
मनै सूनी तनै बहोत घण्या की,
कुल की बेल चलादी स,
सोमपाल न कर कविताइ,
छदं कसुता टोलिया,
बिट्टू कालखा के भजना न,
मन मेरा यो मोह लिया,
गुरु सतंराम न साज बजाके,
भवन म धूम मचादी स,
गायक / प्रेषक – बिट्टू कालखा।
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