
दामोदर घनश्याम मेरे सांवरिया नंदलाल
दामोदर घनश्याम मेरे सांवरिया नंदलाल,
दे दे आशीर्वाद बाबा, दे दे आशीर्वाद ।।
फरारी की सवारी दे दे जिसकी तेज रफ्तार,
छोटी सी एक लॉटरी जो हो बेशुमार ।
बड़ा सा एक बंगला दे दे, स्विमिंग पूल हो साथ,
सुंदर सी एक बहु दे दे जो हो लेक्चरार,
सुघड़ सा एक पोता दे दे जो हो बसन्त बहार ।
घर अंगना मेरा सुंदर लागे, खिला रहे गुलजार,
खाने में भी खास ना चाहिए, सांबर, बड़ा, सलाद,
बर्गर पिज्जा साथ में पेप्सी भरा गिलास ।
बस इतना सा भोजन दे दे भरपूर रहे भण्डार,
दमदम मेरी बिंदिया दमके, गले हीरो का हार,
हाथों में हथफूल चमके जो हो वजनदार ।
छम छम मेरी पायल बाजै चाल चलू मस्तान,
साठ कली का घाघरा चुनरी जरीदार,
सजधज कर मैं सतसंग जाऊँ सोलह करुं श्रृंगार ।
चार सखी मेरे संग में चालै, मेरी हिरणी जैसी चाल,
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