
नजरे चुरा के बैठे सरकार क्यों बताओ
नजरे चुरा के बैठे,
सरकार क्यों बताओ,
कबसे खड़े हैं दर पे,
पलकें ज़रा उठाओ,
नज़रें चुरा के बैठे।।
तर्ज – नजरे मिला के मुझसे।
रुसवाई आपकी ये,
हमसे सही ना जाए,
गुजरी है दिल पे जो भी,
तुमसे कही ना जाए,
खामोश ये जुबां भी,
अब तो रही ना जाए,
हमसे हुई खता क्या,
इतना ज़रा बताओ,
बेचैन कर रही है,
खामोशियाँ ये तेरी,
नादाँ हूँ माफ़ कर दे,
बदमाशियां तू मेरी,
हमपे भी तो चढ़ा दे,
मदहोशियाँ वो तेरी,
चरणों का अब दीवाना,
हमको ज़रा बनाओ,
माना खता हुई है,
तू माफ़ श्याम करना,
पागल समझ के मुझको,
दिल साफ़ श्याम करना,
छोटा मैं तुम बड़े हो,
इन्साफ श्याम करना,
ड्योढ़ी पे ‘हर्ष; आया,
अपने गले लगाओ,
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