
नवरात्रि आयी आओ,
चलो हम नाचे गाये,
ओ जयकारा मैया का करते हुए,
वैष्णो देवी माँ के दर पे जाये,
गुलाल संग उड़े रंग कई हवाओ में,
उमंग छाया हुआ आज हर दिशाओ में,
महकते फूल झरे बेशुमार राहों में,
चमक है एक अनोखिसी हर निगाहों में,
भवन की राह पे देखो चला ये मेला है,
करीब आ रही माँ से मिलन की बेला है,
पुकारे माँ बांहे फैला..
हम हर कदम पर माँ की इबादत करते चले,
नगाड़े झांझ मंजीरे बजाते झूमेंगे,
पहुंच के भवन में मैया के पाव चूमेंगे,
सलोनी मूर्ति मैया की हम निहारेंगे,
वहाँ पे आरती मैया की हम उतारेंगे,
हो रात चाहे के दिन हो कदम बढ़ायेंगे,
जो साथ लाये चढ़ावा उसे चढ़ायेंगे,
चलो दुआ पाये माँ से..
करवाये कीर्तन मिल के माँ की हम जय जय करे,
हमारी मन्नतें पूरी करेगी मैया ही,
है खाली झोलिया अपनी भरेगी मैया ही,
तेरे करम की बदौलत मिला है सब कुछ ही,
मिला वो माँगा जो हमने ना चाहे अब कुछ भी,
बनाया हमको है इंसान ये भी क्या कम है,
जो करती हम पे है एहसान ये भी क्या कम है,
रखो दया ये ही चाहे..
इंसानियत है सच्चा धरम ये हम सीख ले,
ओ वैष्णो देवी माँ के चरणों में जा,
श्रद्धा के फूलो की माला धरे,
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