
निर्बल का साथी है तू दाता दयावान है
निर्बल का साथी है तू,
दाता दयावान है,
सांवरा सलोना तू,
प्यार का खिलौना तू,
हर दिल का अरमान है,
तर्ज – फूलों सा चेहरा तेरा।
जिसका नहीं है कोई जहां में,
उसको तू देता सहारा सदा,
तेरे भरोसे जो जी रहे हैं,
हस हस के करते गुजारा सदा,
तेरा सहारा है, साथ तुम्हारा है,
उसका जमाना क्या बिगाड़ सकेगा,
तूने बनाया है, जो तूने बसाया है,
उसको कोई कैसे उजाड़ सकेगा,
मस्ती में झूमे सदा,
तू जिसपे मेहरबान है,
आया है जो भी कुछ मांगने को,
खाली गया ना वो दरबार से,
हर दम खुला है तेरा खजाना,
और तू लुटाता बड़े प्यार से,
उदास नहीं कोई,निराश नहीं कोई,
जो रोता हुआ आया वो हसता गया है,
तेरी शरण आया जो मांगा वही पाया,
तेरा प्यार सब पर बरसता गया है,
दानी है वरदानी तू,
भक्तों का भगवान है,
बांकी लटक पे बांकी मटक पे,
आंखें अटक गई मैं क्या करूं,
बांकी अदा पे होके फिदा ये,
नियत भटक गई मैं क्या करूं,
दोष क्या है मेरा, है रूप ऐसा तेरा,
जो एक झलक देखा दीवाना हो गया,
मान लो हमारी ओ बांके बिहारी,
मैं क्या तेरा आशिक जमाना हो गया,
तन-मन-धन जानो जिगर,
सब तुझ पे कुर्बान है,
गायक – श्री लखबीर सिंह लक्खा जी,
प्रेषक – शेखर चौधरी,
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