
नैना दर्शन के है बावरे कैसे हारूँ बता सांवरे
नैना दर्शन के है बावरे,
कैसे हारूँ बता सांवरे,
तेरी मुझ पर कृपा है सदा से,
अब बसा ले तेरे गाँव रे,
तर्ज – ज़िन्दगी की ना टूटे।
तूने घर बार ऐसा दिया,
करता हूँ मैं तेरा शुक्रिया,
अपने प्रेमी भगत के ही घर,
तूने मुझको जनम दे दिया,
हाँ जनम दे दिया,
जहाँ तेरा भजन भाव रे,
तेरे भक्तो से जब भी मिलूं,
कैसा लगता कहूं क्या तुझे,
श्याममय लागे सारा जहाँ,
उनमे दीखता है तू ही मुझे,
हाँ तू ही मुझे,
सब में तेरा ही दर्शाव रे,
हारने से ही मिलता जो तू,
नहीं करता मैं इसके गीले,
हार कैसी है और क्या है जीत,
ये तमन्ना है तू ही मिले,
हाँ तू ही मिले,
हारा ‘अरविन्द’ ये दिल सांवरे,
अब गले से लगा सांवरे,
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