
प्रथमेश गजानन नाम तेरो,
हृदय में पधारो मेहर करो,
अमृत रस म्हा पर बरसाओ,
आ जाओ अब ना देर करो,
प्रथमेश गजानंद नाम तेरो,
म्हारे आंगण पाँव धरो देवा,
पावन कर दो म्हारी कर्म धरा,
हे सिद्धिविनायक गणनायक,
इतनी सी अरज स्वीकार करो,
हे एकदन्त शंकर सुवन,
सगळा का काज सरया थासु,
म्हणे अपनी शरण में रख लीजो,
म्हारो भी थे उद्धार करो,
भक्ता का पालनहार गजानंद,
शिव अमृत अभिनन्दन है,
हे सुखकर्ता हे विघ्नहर्ता,
हर सुख का नमन स्वीकार करो,
स्वर – श्री सम्पत दधीच।
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