
पर्वत पे आजा मेरी गौरा,
क्यों देखे गौरा खड़ी खड़ी….
मैं कैसे आऊं मेरे भोले,
मेरे ते प्यारी गंगा तन्ने,
तू तो पगली होइ मेरी गौरा,
गंगा मेरी जटा की शोभा स,
मेरे ते प्यारा चाँद तन्ने,
चंदा मस्तक की शोभा स,
ये सरप मेरे ते प्यारे स,
ये सरप गले की शोभा स,
मेरे ते प्यारा डमरू स,
डमरू मेरे हाथ की शोभा स,
मेरे ते प्यारा नंदी स,
या नंदी मेरी असवारी स,
मेरे ते भगत तन्ने,
भगता ने दर्शन दोनों देवा,
आपां दोनों संकट काटा,
पहाड़ा पर बैठ के भजन करा,
मैं इब आऊं मेरे भोले,
मैं तो बहम करूँ थी खामखा,
मन्ने लगे तन्ने स प्यार घणा,
ईब लगे तन्ने स प्यार घणा…
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