
पहले ध्यान श्री गणेश का,
मोदक भोग लगाओ,
भक्ति मन से कर लो भक्तो,
गणपति के गुण गाओ,
द्वार द्वार घर आसन सब पर,
शुभ प्रभु की है प्रतिमा,
देवो में जो देव पूज्य है,
गणपति की है गरिमा,
मंगल अति सुमंगल है जो,
उनको नयन बसाओ,
आरती स्तुति भजन प्रार्थना,
शंख नाद भी गूंजे,
मंगल जल दर्शन से गणपति,
तन मन सबका भीजे,
सब भक्तो का मंगल कर दो,
मन सब का हरषाओ,
सब त्यौहार उन्ही से शुभ है,
गणपति का त्यौहारा,
मूषक वाहन श्री गणेश का,
ऐसा देव हमारा,
कीर्तन भजन ‘नारायण’ करते,
उत्सव आज मनाओ,
स्वर – साधना सरगम।
प्रेषक – कामेश्वर नाथ त्रिपाठी
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