
पाग टेढ़ी सी धरे,
वा में मोती लटकन,
डाले ब्रज कुंजो में,
झूम के राधा रमन।।
कारी कजरारी सी,
जादू की पिटारि पलकें,
उसपे मद होश भरे,
हाय तेरे तिरछे नयन,
मुस्कुराते हो तो,
जी उठते हैं मरने वाले,
मुस्कुराहट ही तेरी,
करती है जीते जी मरन,
स्वर – दृष्टि शर्मा।
प्रेषक – चरनजीत
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