
पिछम धरा सु म्हारा पीरजी पधारिया,
घर अजमल अवतार लियो,
लाछा सुगना करे हरी री आरती,
हरजी भाटी उबा चवर ढोले,
वैकुंठा में बाबा होवे थारी आरती।।
घिरत मिठाई बाबा चढे थारे चुरमो
धूपा री झंकार उड़े,
गंगा रे जमना बाबा बहे रे सरस्वती,
रामदेवजी बाबो स्नान करे,
दूर देशारा आवे थारे यात्रु,
बावजी री दर्गा आगे निवन करे,
ढोल नगाड़ा धणी रे नोबत बाजे,
झालर री जनकार पड़े
खम्मा खम्मा खम्माओ कंवर अजमाल रा,
हरी शरणा में भाटी हरजी बोले,
नवखंडो में निशान घुंरे,
वारी वारी रे कंवर तपधारी,
जग में ज्योत सवाई जियो,
“श्रवण सिंह राजपुरोहित द्वारा प्रेषित”
सम्पर्क : +91 9096558244
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