
पींघां झूह्टदीयाँ बैणा, वे सत्तो झूटन वारो वार,
सत्तो बैणा झूटन आईआ, डोरा रेशम दिया लेआईया,
पिंघा पीपलां उत्ते पाईया, छम छम वरखा दी बुहार,
पींघां झूह्टदीयाँ बैणा, वे सत्तो झूटन......
झुटे कांगड़े वाली माई, पींघ हवा दे विच चढ़ाई,
भगतां जय जयकार बुलाई, करदे दाती दे दीदार,
झूटन चिंतापूर्णी आवे, ब्रह्मा विष्णु फूल बरसावे,
शंकर वेख वेख मुस्कावे, खुशियां वंडदी बेशुमार,
ज्वाला माँ दे रौनका लग्गियां, ज्योता बिना तेल तो जगियां,
अकबर ज्योता ते तवा चढ़ाया, आ गयी तवा पाड़ के बाहर,
काली माता पींघ चढ़ावे, धरती थर थर कंबदी जावे,
पापी वेख वेख घबरावे, माँ दी लीला अपरम्पार,
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