पूरी हो ज्यासी जो सोची,
सगली मन की बात।
चालो खाटू में, चालो खाटू में,
जगास्यां ग्यारस की रात॥
जयपुर से रींगस, रींगस से तोसवारा,
फागण में खाटू नगरी का देखा अजब नजारा।
श्याम धणी लीले आले की नित नई करामात,
चालो खाटू में, चालो खाटू में,
जगास्यां ग्यारस की रात॥
मेरो श्याम सांवरियो,
सुण ले भगतां री टेर।
हाथों हाथ ही देवे परचो,
टाल करे ना देर।
ओ तो मोटो साहूकार,
बाबो मोटो साहूकार,
के श्याम प्रभु की बात।
चालो खाटू में, चालो खाटू में,
जगास्यां ग्यारस की रात॥
कोठी माँगी कोठी दे दी,
गाड़ी माँगी गाड़ी दे दी।
बाँझ के गोदी बाबा भर दी,
दादी ने दे दियो पोतो।
आयो हंसतो हंसतो घर में,
गयो जो रोतो रोतो।
शीश के दानी देता देख्या
मुँह माँगी सौगात।
चालो खाटू में, चालो खाटू में,
जगास्यां ग्यारस की रात॥
क्यों दर-दर भटकें,
ले श्याम सुंदर की ओट।
सरल बावला मिट ज्यासी
थारे मन की सगली खोट।
लक्खा सबकी सुणे मेरो बाबो,
देखे जात ना पात।
चालो खाटू में, चालो खाटू में,
जगास्यां ग्यारस की रात॥
पूरी हो ज्यासी जो सोची,
सगली मन की बात।
चालो खाटू में, चालो खाटू में,
जगास्यां ग्यारस की रात॥
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