
प्रगटी सिया सुखदैया,
जनकपुर में बाजे बधैया,
बाजे बधैया आज बाजे बधैया,
प्रकटी सिया सुखदैया,
तर्ज – जन्मे है राम रघुरैया।
मख महि कर्षत औचक प्रगट भई,
हरषे लोग लुगैया,
धन धन जनक जनकपुर धरनी,
धन्य सुनैना मैया,
धन्य धन्य भाभी सिद्धि प्यारी,
धन लक्ष्मीनिधि भैया,
बाबा लुटावत हाथी यूँ घोडा,
कनक वसन मणि गैया,
मैया लुटावे वसन आभूषण,
हिरा अशर्फी रुपैया,
स्वस्तिक पाठ पढ़त पंडितजन,
द्वारे बजत शहनईया,
अंगना में अलिगन नाचत गावत,
नाचे ता थई ताता थैया,
निरख निरख पुर नारी ललीमुख,
पुनि पुनि लेत बलैया,
चिर जीवो श्री जनक लाड़ली,
खेलों जनक आंगनिया,
वर अनुरूप मिले अविनाशी,
रहे शिव शंकर सहैया,
अचल सुहाग भाग परिपूरण,
अचल रहे प्रभु तैया,
तुम्हरी कृपा से नारायण की,
पार लगेगी नैया,
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