
प्रगट भये कृष्ण कन्हाई नंद घर बटत बधाई
प्रगट भये कृष्ण कन्हाई,
दोहा – कृष्ण पक्ष की अष्टमी,
भादो मास बुधवार,
कारागृह में कंस के,
प्रगट भये नंदलाल।
नंद भवन में उत्सव छाया,
बज रही है शहनाई,
देखो नंद यशोदा हरसे,
हरसे नर और नारी,
नंद घर बटत बधाई,
प्रगट भए कृष्ण कन्हाई,
ब्रह्मा भी आए देखो,
विष्णु भी आए,
देखो शंकर योगी बन आए,
नंद गांव देखो आज बना है,
पूर्ण ब्रह्म का धाम,
गोकुल में खुशियां छाई,
मात यशोदा गोद खिलावे,
रेशम डोरी से झूला झुलावे,
सिर पे तिलक आंख में काजल,
कर रही नजर उतार,
देखो ये शुभ घड़ी आई,
धरती अंबर चांद सितारे,
झूम रहे सब हिलमिल सारे,
फूल सुगंध से महक उठा है,
देखो सकल जहान,
तुम्ही से दुनिया सारी,
प्रकट भए कृष्ण कन्हाई,
गोप बाल सब मंगल गावे,
अन्न धन लक्ष्मी नंदजी लुटावे,
व्यास दास नित करत आरती,
व्यासदास नित करत आरती,
पुण्य उदय भयो आज,
आनंद घन गिरवर धारी,
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