
प्रभु अपने दर से
तरज़-अंखियों को रहनें दो
प्रभु अपने दर से,अब तो ना टालो
गिरा जा रहा हूँ,उठा लो उठा लो
प्रभु दर से...
खाली ना जाता कोई,दर से तुम्हारे
कब से खड़ा हूँ द्वारे,बाहें पसारे
चरणों की सेवा में,लगा लो लगा लो
प्रभु अपने दर से...
नहीं टूट पायेगा,दुनियाँ का बंधन
जब तक कृपा ना होगी,तेरी
रघुनंदन
कदम लड़खड़ाए हैं,संभालो
संभालो
अगर था हटाना तो,फिर क्यों
बुलाया
सोते ही रहने देते,काहे जगाया
अब जब जगाया तो,अपना बना
प्रभु अपने दर से,अब तो ना
टालों
बंधन प्रताप सारे,टूट चुके हैं
जितनें सहारे थे,छूट चुके हैं
अवसर मिला है अपना,वादा
निभा लो
गिरा जा रहा हूँ,उठा लो उठा
बाबा धसका पागल पानीपत
संपर्कंसुत्र-7206526000
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